1.(शुरुआती अवस्था से ही समाधान – Early Stage Guide)
गेहूं भारत की प्रमुख रबी फसल है और देश की खाद्य सुरक्षा में इसकी बहुत बड़ी भूमिका है। लेकिन हर साल बहुत से किसान रोगों के कारण गेहूं की पैदावार में भारी नुकसान झेलते हैं।
अच्छी बात यह है कि अगर बुवाई से लेकर शुरुआती 35–40 दिनों तक सही देखभाल कर ली जाए, तो गेहूं के अधिकतर रोगों से आसानी से बचा जा सकता है। आइये समझते है (गेहूं मे रोग लगाने से कैसे बचाए)
इस लेख में हम जानेंगे कि गेहूं में रोग क्यों लगते हैं, उनकी शुरुआती पहचान कैसे करें, और early stage में कौन-कौन से उपाय सबसे ज्यादा असरदार हैं।
2.गेहूं में रोग लगने के मुख्य कारण?
गेहूं में लगने वाले अधिकतर रोग फफूंद (Fungus) से होते हैं, लेकिन इनके पीछे कई कारण होते हैं:
बिना उपचारित बीज का प्रयोग
देर से बुवाई करना
अधिक (यूरिया) डालना
नाइट्रोजन
ज्यादा सिंचाई या जलभराव
कोहरा, नमी और मौसम में अचानक बदलाव
कमजोर मिट्टी और पोषक तत्वों की कमीजब पौधा कमजोर होता है, तब रोग जल्दी हमला करते हैं।
3.शुरुआती अवस्था (Early Stage) क्या होती है?
गेहूं की शुरुआती अवस्था का मतलब है:
बुवाई से लेकर 35–40 दिन तक का समय
इसी समय जड़ें मजबूत बनती हैं
पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है
अगर इस समय सही देखभाल हो जाए, तो बाद में रोग लगने की संभावना बहुत कम हो जाती है
4.( गेहूं मे रोग लगाने से कैसे बचाए )शुरुआती उपाय (Step-by-Step)
5. बीज शोधन – रोग से बचाव की पहली ढाल
बीज शोधन गेहूं की फसल को रोगों से बचाने का सबसे जरूरी उपाय है।
1.बीज शोधन क्यों जरूरी है?
मिट्टी में रहने वाले रोगों से सुरक्षा
अंकुरण अच्छा होता है
जड़ें मजबूत बनती हैं
2.बीज शोधन कैसे करें?
प्रमाणित (Certified) बीज का ही उपयोग करें
बुवाई से पहले बीज को फफूंदनाशक दवा से उपचारित करें
(जैसे: कार्बेन्डाजिम / थिरम – मात्रा पैकेट के अनुसार)
बीज शोधन करने से 60–70% रोग अपने आप नियंत्रित हो जाते हैं।
6.सही समय पर बुवाई करें
7.सही समय:
उत्तर भारत में: नवंबर का पहला पखवाड़ा
देर से बुवाई करने पर:
रतुआ रोग
झुलसा रोग
पाउडरी मिल्ड्यू
जैसे रोग जल्दी लग जाते हैं।
8.मिट्टी की सही तैयारी करें
स्वस्थ मिट्टी ही स्वस्थ फसल की नींव होती है।
9.मिट्टी के लिए जरूरी बातें:
खेत की गहरी जुताई करें
पिछली फसल के अवशेष हटा दें
सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालें
10.मिट्टी परीक्षण (Soil Test)
मिट्टी की जांच कराने से पता चलता है:
कौन सा पोषक तत्व कम है
कितना उर्वरक देना चाहिए
इससे अनावश्यक खाद डालने से बचाव होता है और रोग कम लगते हैं।
11.संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें
अधिक यूरिया डालना गेहूं के रोगों को न्योता देना है।
12.सही तरीका:
-
नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित प्रयोग करें
-
यूरिया को एक साथ न डालें, किस्तों में दें
संतुलित पोषण से पौधा मजबूत होता है और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
13.सिंचाई का सही प्रबंधन करें
शुरुआती अवस्था में अधिक सिंचाई करना बहुत खतरनाक हो सकता है।
14.ज्यादा पानी देने से:
जड़ सड़न
फफूंद जनित रोग
पौधे कमजोर हो जाते हैं
14.सही तरीका:
जरूरत के अनुसार सिंचाई करें
खेत में जलभराव न होने दें
नालियों की व्यवस्था सही रखें
15.रोग के शुरुआती लक्षण पहचानें
~हर किसान को सप्ताह में कम से कम एक बार खेत का निरीक्षण जरूर करना चाहिए।
16.शुरुआती लक्षण:
पत्तियों पर पीले या भूरे धब्बे
सफेद चूर्ण जैसा पदार्थ
पौधे की बढ़वार रुक जाना
पत्तियों का सूखना या मुरझान
जैसे ही लक्षण दिखें, तुरंत उपाय क
17.रोकथाम के लिए छिड़काव (Preventive Spray)
अगर मौसम में अधिक नमी, कोहरा या ठंड हो, तो रोग का खतरा बढ़ जाता है।
18.ऐसे समय:
रोकथाम के लिए फफूंदनाशक दवा का छिड़काव करें
आसपास के खेतों में रोग दिखे तो पहले से सावधान रहें
(दवा का प्रयोग कृषि विशेषज्ञ की सलाह से करें)
19.जैविक एवं देसी उपाय
नीम तेल का छिड़काव (शुरुआती अवस्था में)
जीवामृत या घन जीवामृत का प्रयोग
फसल चक्र अपनाएं
ये उपाय मिट्टी को स्वस्थ रखते हैं और लंबे समय तक रोग कम करते हैं।
20.किसान अक्सर कौन-सी गलतियां करते हैं?
बीज शोधन नहीं करना
देर से बुवाई करना
ज्यादा यूरिया डालना
रोग दिखने के बाद ही दवा डालना
खेत का निरीक्षण न करना
इन गलतियों से बचकर ही फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है।
22.निष्कर्ष (Conclusion)
(गेहू मे रोग लगाने से कैसे बचाए ?Gehu ko rog se kaise bachaye)सबसे अच्छा तरीका है शुरुआती अवस्था में सही देखभाल
समय पर बुवाई, बीज शोधन और संतुलित खाद से फसल मजबूत बनती है
मजबूत फसल में रोग कम लगते हैं और उपज अधिक मिलती है
अगर किसान शुरुआत से ही सावधानी बरतें, तो गेहूं की फसल को रोगों से काफी हद तक बचाया जा सकता है