Organic Farming (जैविक खेती)

🌾 जैविक खेती (Organic Farming) – किसानों के लिए वरदान

भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ की ज़्यादातर आबादी गाँवों में रहती है। गाँव की अर्थव्यवस्था की रीढ़ खेती है। लेकिन आधुनिक समय में रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अधिक इस्तेमाल से न सिर्फ़ खेती की लागत बढ़ी है बल्कि मिट्टी की उर्वरकता और पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचा है। ऐसे समय में जैविक खेती (Organic Farming) किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है।


✅ जैविक खेती क्या है?

जैविक खेती एक ऐसी पद्धति है जिसमें खेती करने के लिए केवल प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें रासायनिक खाद और कीटनाशक का प्रयोग बिल्कुल नहीं होता।

  • गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद और नीम की खली का प्रयोग किया जाता है।

  • कीटों से बचाव के लिए नीम का तेल, जीवामृत और अन्य जैविक घोल का प्रयोग होता है।


✅ जैविक खेती के फायदे

  1. मिट्टी की उर्वरकता बढ़ती है – मिट्टी में सूक्ष्म जीवाणु और पोषक तत्व सक्रिय रहते हैं।
  2. स्वास्थ्यवर्धक फसल – रसायनों से मुक्त फसल खाने से स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है।
  3. लागत कम होती है – जैविक खाद और कीटनाशक आसानी से स्थानीय स्तर पर बन जाते हैं।
  4. बाज़ार में अच्छी कीमत – ऑर्गेनिक प्रोडक्ट की डिमांड ज़्यादा है और दाम भी अच्छे मिलते हैं।
  5. पर्यावरण की रक्षा – जैविक खेती से पानी और मिट्टी प्रदूषित नहीं होते।

✅ जैविक खाद कैसे तैयार करें?

  • वर्मी कम्पोस्ट: इसमें केंचुओं की मदद से जैविक खाद तैयार की जाती है।

  • जीवामृत: देसी गाय का गोबर, गौमूत्र, बेसन और गुड़ मिलाकर यह घोल तैयार किया जाता है।

  • हरी खाद: खेत में सन, ढैंचा जैसी फसल बोकर फिर मिट्टी में दबा दी जाती है।


✅ जैविक खेती की चुनौतियाँ

  • शुरू में उत्पादन थोड़ा कम हो सकता है।

  • बाज़ार तक ऑर्गेनिक उत्पाद पहुँचाना कभी-कभी मुश्किल होता है।

  • किसानों को जैविक खेती की तकनीक सीखने की ज़रूरत होती है।


✅ सरकार की मदद और योजनाएँ

भारत सरकार और कई राज्य सरकारें किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए सब्सिडी, ट्रेनिंग और फाइनेंशियल सपोर्ट देती हैं।

  • परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY)

  • राष्ट्रीय जैविक खेती मिशन (NBOF)


🌱 निष्कर्ष

आज के समय में जैविक खेती किसानों के लिए न केवल लाभदायक है बल्कि यह पर्यावरण और स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए भी ज़रूरी है। अगर किसान इसे अपनाते हैं, तो उन्हें कम लागत में अच्छा मुनाफ़ा मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उपजाऊ मिट्टी सुरक्षित रहेगी।


✍️ यह ब्लॉग आपकी वेबसाइट myvillagemykheti.com पर डालने के लिए तैयार है।

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